पराली प्रबंधन
पराली प्रबंधन कृषि विभाग, महोली की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य फसल कटाई के बाद निकलने वाली पराली (फसल अवशेष) का उचित प्रबंधन करना, खेतों में आग लगाने की समस्या को रोकना तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों को आर्थिक लाभ प्रदान करना है। पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरता में कमी और स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह योजना अत्यंत आवश्यक है।
पराली जलाने से होने वाले नुकसान
वायु प्रदूषण में अत्यधिक वृद्धि
मिट्टी के उपयोगी जीवाणुओं का नाश
भूमि की उर्वरता में कमी
मानव एवं पशुओं के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
पर्यावरण असंतुलन एवं जलवायु परिवर्तन
पराली प्रबंधन का उद्देश्य
- पराली जलाने की प्रथा को पूर्ण रूप से रोकना
- फसल अवशेषों का खेत में ही उपयोग बढ़ाना
- मिट्टी की सेहत में सुधार करना
- किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना
- स्वच्छ पर्यावरण एवं सुरक्षित खेती को बढ़ावा देना
पराली प्रबंधन के आधुनिक तरीके
कृषि यंत्रों द्वारा प्रबंधन
हैप्पी सीडर
सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS)
मल्चर
रोटावेटर
रीपर-बाइंडर
🌱 जैविक एवं प्राकृतिक तरीके
पराली को खेत में मिलाकर जैविक खाद बनाना
कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग
फसल अवशेषों से मल्चिंग करना
पराली प्रबंधन पर अनुदान योजना
कृषि विभाग द्वारा पराली प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्रों पर 50% तक का अनुदान प्रदान किया जाता है। इससे किसान कम लागत में आधुनिक यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं और पराली जलाने की आवश्यकता नहीं रहती।
नोट: अनुदान की राशि एवं पात्रता शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित की जाती है।
किसानों को होने वाले लाभ
मिट्टी की उर्वरता एवं नमी में वृद्धि
अगली फसल की पैदावार में सुधार
खेती की लागत में कमी
पर्यावरण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा
सरकारी नियमों के पालन से दंड से बचाव
पराली प्रबंधन योजना में आवेदन प्रक्रिया
- किसान कृषि विभाग, महोली कार्यालय से संपर्क करें
- पराली प्रबंधन योजना के अंतर्गत आवेदन करें
- आवश्यक दस्तावेज जमा करें
- सत्यापन के पश्चात अनुदान स्वीकृति
- अनुदानित यंत्रों का उपयोग कर पराली प्रबंधन करें
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड
- भूमि के दस्तावेज (खतौनी)
- बैंक पासबुक
- मोबाइल नंबर